किसी बीमारी, चोट या सर्जरी के बाद कुछ मरीजों को लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ सकता है। ऐसे समय में मरीज की देखभाल केवल दवा और भोजन तक सीमित नहीं रहती।
मरीज की साफ-सफाई, आराम, त्वचा की स्थिति और शरीर की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी होता है। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से शरीर के कुछ हिस्सों पर लगातार दबाव पड़ सकता है। इससे Pressure Sore या Pressure Ulcer होने का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए घर पर मरीज की देखभाल करने वाले परिवार के लोगों और caregivers के लिए कुछ जरूरी बातें समझना उपयोगी है।
Pressure Sore क्या होता है?
Pressure Sore को आम भाषा में Bed Sore या बेड पर होने वाला घाव भी कहा जाता है। यह त्वचा और उसके नीचे के tissue को लंबे समय तक दबाव पड़ने से होने वाली चोट है।
यह समस्या खासकर उन लोगों में देखी जा सकती है जो लंबे समय तक बिस्तर पर रहते हैं या खुद अपनी position बदलने में सक्षम नहीं होते।
शरीर के जिन हिस्सों में हड्डी त्वचा के करीब होती है, वहां इसका खतरा ज्यादा हो सकता है। जैसे एड़ी, कूल्हे, पीठ के निचले हिस्से और कोहनी।
कौन से मरीज ज्यादा जोखिम में हो सकते हैं?
हर लंबे समय तक बिस्तर पर रहने वाले मरीज को Pressure Sore होगा, ऐसा नहीं है। लेकिन कुछ स्थितियों में इसका जोखिम बढ़ सकता है।
खास तौर पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है अगर मरीज:
- खुद करवट या position नहीं बदल सकता।
- लंबे समय तक बिस्तर पर रहता है।
- बहुत कम खाना खा रहा है।
- पर्याप्त fluid नहीं ले पा रहा है।
- पेशाब या मल पर नियंत्रण नहीं रख पाता।
- त्वचा लगातार गीली रहती है।
- शरीर के किसी हिस्से में sensation कम है।
- पहले Pressure Sore हो चुका है।
- बहुत कमजोर या कुपोषित है।
उम्र बढ़ने के साथ त्वचा भी अधिक नाजुक हो सकती है। इसलिए बुजुर्ग मरीजों की skin care पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
मरीज की Position बदलना क्यों जरूरी है?
लंबे समय तक एक ही position में रहने से शरीर के किसी हिस्से पर लगातार दबाव पड़ सकता है। Position बदलने से उस दबाव को कम करने में मदद मिलती है।
अगर मरीज खुद position बदल सकता है, तो उसकी क्षमता के अनुसार उसे सुरक्षित तरीके से movement के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
अगर मरीज खुद नहीं हिल सकता, तो caregiver को healthcare professional की सलाह के अनुसार उसकी position बदलने में मदद करनी चाहिए। कितनी बार position बदलनी है, यह मरीज की स्थिति और risk के अनुसार तय किया जाना चाहिए।
मरीज को बिस्तर पर खींचने के बजाय सुरक्षित तरीके से reposition करना जरूरी है। गलत तरीके से खींचने पर skin में friction और shear हो सकता है। इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है।
मरीज की त्वचा रोज देखें
बिस्तर पर रहने वाले मरीज की त्वचा को नियमित रूप से देखना बहुत जरूरी है।
खास तौर पर उन जगहों को देखें जहां हड्डी त्वचा के करीब होती है।
इन संकेतों पर ध्यान दें:
- त्वचा का रंग बदलना
- लाल या गहरा पड़ना
- सूजन
- छाला
- त्वचा का असामान्य रूप से चमकदार या गर्म होना
- दर्द या जलन
- त्वचा का टूटना
- कोई घाव बनना
गहरे रंग की त्वचा पर शुरुआती Pressure Damage हमेशा लाल रंग में दिखाई नहीं दे सकता। इसलिए रंग के साथ-साथ सूजन, गर्माहट, दर्द और त्वचा की बनावट में बदलाव को भी देखना चाहिए।
बिस्तर और चादर साफ रखें
मरीज का बिस्तर साफ और सूखा होना चाहिए।
चादर में ज्यादा सिलवटें या गांठें न हों। ऐसी सिलवटें त्वचा पर दबाव और friction बढ़ा सकती हैं।
मरीज के कपड़े भी आरामदायक रखें। अगर कपड़े बहुत तंग हों या किसी जगह लगातार दबाव बना रहे हों, तो उन्हें बदलना चाहिए।
बिस्तर को नियमित रूप से जांचना भी अच्छी Bed Care का हिस्सा है।
त्वचा को साफ और सूखा रखें
मरीज लंबे समय तक बिस्तर पर है तो पसीना, पेशाब या मल के कारण त्वचा में नमी बनी रह सकती है।
लगातार नमी रहने से त्वचा कमजोर हो सकती है और damage का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए जरूरत पड़ने पर त्वचा को धीरे से साफ करें और अच्छी तरह सुखाएं।
त्वचा को साफ करते समय बहुत जोर से रगड़ने से बचें।
अगर मरीज को बार-बार incontinence की समस्या होती है, तो caregiver को त्वचा की नियमित सफाई और उचित protection के बारे में healthcare professional की सलाह लेनी चाहिए।
मरीज को खींचकर न उठाएं
बिस्तर पर पड़े मरीज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना कई बार मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में मरीज को चादर पर खींचना आसान लग सकता है। लेकिन इससे त्वचा और tissue पर friction तथा shear का दबाव पड़ सकता है।
इसलिए मरीज को reposition या transfer करते समय सही technique अपनाना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर परिवार के सदस्य healthcare staff से सुरक्षित तरीका सीख सकते हैं।
मरीज के भोजन पर ध्यान दें
मरीज की त्वचा और शरीर की recovery के लिए पर्याप्त nutrition महत्वपूर्ण है।
अगर मरीज लंबे समय से ठीक से खाना नहीं खा रहा है, वजन कम हो रहा है या कमजोरी बढ़ रही है, तो healthcare professional से बात करनी चाहिए।
भोजन में पर्याप्त protein और दूसरे जरूरी nutrients की भूमिका हो सकती है। मरीज की बीमारी के अनुसार diet की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए गंभीर बीमारी या विशेष medical condition में diet डॉक्टर या dietitian की सलाह से तय करना बेहतर है।
पानी और Hydration का ध्यान रखें
पर्याप्त fluid लेना भी सामान्य स्वास्थ्य और त्वचा की देखभाल के लिए महत्वपूर्ण है।
लेकिन हर मरीज के लिए पानी की मात्रा एक जैसी नहीं होती। कुछ मरीजों को kidney, heart या दूसरी health conditions के कारण fluid की मात्रा सीमित करने की सलाह दी जा सकती है।
इसलिए ऐसे मरीजों में पानी की मात्रा डॉक्टर या healthcare professional की सलाह के अनुसार ही रखें।
क्या मरीज को Massage करना चाहिए?
Pressure Sore से बचाने के लिए शरीर के दबाव वाले हिस्सों पर जोर से massage करना सही तरीका नहीं माना जाना चाहिए।
अगर त्वचा में पहले से लालिमा, दर्द, सूजन या damage दिखाई दे रहा है, तो उस हिस्से पर रगड़ या दबाव देने के बजाय healthcare professional से सलाह लें।
खासकर किसी संभावित Pressure Injury पर बिना सलाह के तेल, क्रीम या घरेलू उपचार लगाने से बचना बेहतर है।
Pressure Sore के शुरुआती संकेत दिखें तो क्या करें?
अगर किसी हिस्से की त्वचा का रंग बदल रहा है, सूजन है, छाला बन रहा है या मरीज उस जगह दर्द और जलन की शिकायत कर रहा है, तो इसे नजरअंदाज न करें।
मरीज की position बदलने में मदद करें और प्रभावित हिस्से पर अनावश्यक दबाव कम करने की कोशिश करें।
इसके बाद healthcare professional से सलाह लें। शुरुआती स्तर पर समस्या की पहचान होने से आगे होने वाले skin damage को कम करने में मदद मिल सकती है।
अगर घाव बन गया है तो क्या करें?
अगर त्वचा टूट गई है या घाव बन चुका है, तो इसे सामान्य खरोंच समझकर घरेलू उपचार करना ठीक नहीं है।
घाव की गहराई और स्थिति का assessment healthcare professional द्वारा किया जाना चाहिए।
घाव में संक्रमण के संकेत, जैसे बढ़ती लालिमा, सूजन, असामान्य discharge, बदबू या मरीज की हालत बिगड़ना दिखाई दे तो medical advice लेना जरूरी है।
Pressure Ulcer का उपचार केवल dressing तक सीमित नहीं होता। घाव पर दबाव कम करना और मरीज की overall condition का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है।
घर पर मरीज की देखभाल करने वालों के लिए आसान Checklist
रोज मरीज की देखभाल करते समय इन बातों पर ध्यान दिया जा सकता है:
- मरीज की position और movement देखें।
- त्वचा को नियमित रूप से जांचें।
- बिस्तर साफ और सूखा रखें।
- चादर में ज्यादा सिलवटें न रहने दें।
- पसीने और incontinence से त्वचा को गीला न रहने दें।
- मरीज के भोजन और fluid intake पर ध्यान दें।
- मरीज को उठाते या reposition करते समय सही technique अपनाएं।
- किसी लाल, गहरे, सूजे हुए या टूटे हुए हिस्से को नजरअंदाज न करें।
- जरूरत पड़ने पर nurse या doctor से सलाह लें।
कब तुरंत Medical Advice लेना चाहिए?
निम्न स्थिति में healthcare professional से जल्द संपर्क करना चाहिए:
- त्वचा पर घाव बन गया हो।
- घाव तेजी से बढ़ रहा हो।
- प्रभावित जगह पर ज्यादा सूजन या दर्द हो।
- घाव से discharge या बदबू आ रही हो।
- मरीज को बुखार या अस्वस्थता हो।
- त्वचा का रंग तेजी से बदल रहा हो।
- मरीज की सामान्य हालत अचानक खराब हो रही हो।
Pressure Injury गंभीर हो सकती है। इसलिए शुरुआती बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष
बिस्तर पर रहने वाले मरीज की देखभाल में केवल दवा और भोजन पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। Skin Care, Position Change, साफ-सफाई, Nutrition और Hydration भी महत्वपूर्ण हैं।
मरीज की स्थिति के अनुसार नियमित movement और repositioning से लंबे समय तक एक जगह दबाव पड़ने का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
साथ ही, त्वचा में होने वाले छोटे बदलावों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर लालिमा, सूजन, छाला या घाव दिखाई दे, तो समय पर healthcare professional की सलाह लेना बेहतर है।
मरीज की सुरक्षित देखभाल का सबसे अच्छा तरीका है—उसकी स्थिति को समझना, नियमित रूप से निगरानी रखना और जरूरत पड़ने पर medical team की सलाह लेना।


