प्रोटीन हमारे शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में से एक है। मांसपेशियों, त्वचा और शरीर के कई दूसरे ऊतकों के निर्माण और उनके सामान्य कामकाज में इसकी भूमिका होती है। शरीर में बनने वाले कई महत्वपूर्ण पदार्थों के लिए भी प्रोटीन जरूरी होता है।
आमतौर पर जब हम प्रोटीन की बात करते हैं तो सबसे पहले दूध, अंडा, मछली या मांस का ध्यान आता है। लेकिन प्रोटीन केवल इन्हीं चीजों से नहीं मिलता। दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, मूंगफली और दूसरे कई खाद्य पदार्थ भी प्रोटीन के स्रोत हैं।
किसी व्यक्ति के भोजन में लंबे समय तक पर्याप्त प्रोटीन और अन्य जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल रहे हों तो स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। हालांकि केवल थकान या कमजोरी देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी व्यक्ति में प्रोटीन की कमी है। इसके पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
प्रोटीन शरीर के लिए क्यों जरूरी है?
प्रोटीन शरीर के कई महत्वपूर्ण कामों में शामिल होता है। यह मांसपेशियों और शरीर के दूसरे ऊतकों के निर्माण और रखरखाव में मदद करता है। शरीर में बनने वाले कई एंजाइम और हार्मोन भी प्रोटीन से जुड़े होते हैं।
बच्चों और किशोरों के विकास के दौरान प्रोटीन की जरूरत विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है। बीमारी, चोट या शरीर की recovery के दौरान भी पोषण का पर्याप्त होना जरूरी होता है।
इसलिए रोज के भोजन में प्रोटीन के अच्छे स्रोत शामिल करना संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
प्रोटीन की कमी के संभावित संकेत क्या हैं?
प्रोटीन की कमी के लक्षण व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और कमी की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। केवल एक लक्षण के आधार पर प्रोटीन की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
कुछ संभावित संकेतों में शामिल हैं:
लगातार कमजोरी और थकान
अगर भोजन पर्याप्त नहीं है या उसमें जरूरी पोषक तत्वों की कमी है तो व्यक्ति को कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है।
लेकिन लगातार थकान का कारण केवल प्रोटीन की कमी नहीं होती। एनीमिया, नींद की कमी, संक्रमण और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसकी वजह हो सकती हैं।
मांसपेशियों की कमजोरी
प्रोटीन शरीर की मांसपेशियों के लिए महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक पर्याप्त पोषण नहीं मिलने पर मांसपेशियों की ताकत और शरीर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
अगर किसी व्यक्ति को सामान्य काम करने में पहले की तुलना में अधिक परेशानी होने लगे या शरीर की ताकत लगातार कम महसूस हो तो इसकी वजह जानना जरूरी है।
मांसपेशियों का कम होना
लंबे समय तक पर्याप्त पोषण न मिलने पर शरीर की मांसपेशियों पर असर पड़ सकता है। बुजुर्गों, लंबे समय से बीमार लोगों और बहुत कम भोजन करने वाले लोगों में पोषण की स्थिति पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो सकता है।
बच्चों के विकास पर असर
बच्चों को बढ़ने और विकसित होने के लिए पर्याप्त ऊर्जा और विभिन्न पोषक तत्वों की जरूरत होती है। लगातार खराब या अपर्याप्त भोजन मिलने पर उनके विकास पर असर पड़ सकता है।
बच्चे का वजन या लंबाई उम्र के अनुसार ठीक से नहीं बढ़ रही हो तो केवल घर से protein powder या supplement शुरू करने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
बीमारी से उबरने में परेशानी
शरीर को बीमारी या चोट के बाद recovery के लिए पर्याप्त ऊर्जा और पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसलिए लंबे समय से कम भोजन करने वाले या कुपोषण के जोखिम वाले व्यक्ति में recovery प्रभावित हो सकती है।
हालांकि recovery में देरी के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए इसे अकेले प्रोटीन की कमी का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
प्रोटीन की कमी क्यों हो सकती है?
प्रोटीन की कमी केवल इसलिए नहीं होती कि व्यक्ति दाल या अंडा नहीं खाता। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
कुछ लोगों का भोजन ही पर्याप्त नहीं होता। कुछ लोग बीमारी, भूख कम लगने या निगलने की समस्या के कारण पर्याप्त भोजन नहीं कर पाते।
कुछ स्वास्थ्य समस्याओं में शरीर की पोषण संबंधी जरूरत बढ़ सकती है या भोजन से पोषक तत्वों का उपयोग प्रभावित हो सकता है।
गरीबी, भोजन की उपलब्धता की कमी और बहुत सीमित आहार भी पोषण की कमी का कारण बन सकते हैं।
इसलिए किसी व्यक्ति में पोषण की समस्या होने पर केवल एक nutrient को दोष देना सही नहीं है।
रोज कितना प्रोटीन चाहिए?
हर व्यक्ति के लिए प्रोटीन की जरूरत एक जैसी नहीं होती। उम्र, शरीर के वजन, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य और जीवन की अलग-अलग अवस्थाओं के अनुसार आवश्यकता बदल सकती है।
WHO के अनुसार सामान्य स्वस्थ वयस्कों के लिए कुल ऊर्जा का लगभग 10–15 प्रतिशत प्रोटीन से मिलना आम तौर पर पर्याप्त हो सकता है, हालांकि कुछ परिस्थितियों में जरूरत इससे अधिक हो सकती है।
इसलिए केवल किसी इंटरनेट calculator या दूसरे व्यक्ति की diet देखकर अपनी protein requirement तय करना सही नहीं है।
प्रोटीन किन खाद्य पदार्थों से मिलता है?
हमारे आसपास आसानी से मिलने वाले कई खाद्य पदार्थ प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।
दालें और फलियां
अरहर, मसूर, मूंग और चना जैसी दालें भारतीय भोजन का सामान्य हिस्सा हैं और protein के उपयोगी स्रोत हो सकती हैं।
राजमा, छोला और दूसरे legumes भी भोजन में शामिल किए जा सकते हैं।
दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ
दूध, दही और पनीर जैसे खाद्य पदार्थ भी protein देते हैं। हालांकि इन्हें व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और भोजन की जरूरत के अनुसार लेना चाहिए।
अंडा
अंडा protein का एक अच्छा स्रोत है और कई लोगों के लिए इसे संतुलित भोजन में शामिल करना आसान होता है।
मछली और मांस
मछली, चिकन और अन्य meat products भी protein के स्रोत हैं। इन्हें संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है।
सोयाबीन और अन्य पौधों से मिलने वाले स्रोत
सोयाबीन, टोफू, मूंगफली और कुछ अन्य plant-based foods भी protein देते हैं।
WHO भी विविध आहार में pulses, whole grains और विभिन्न plant तथा animal sources से protein लेने की बात करता है।
क्या केवल प्रोटीन बढ़ाने से कमजोरी दूर हो जाएगी?
जरूरी नहीं।
कमजोरी के पीछे एनीमिया, थायरॉयड की समस्या, संक्रमण, नींद की कमी, मानसिक तनाव, लंबे समय से चल रही बीमारी या कई अन्य कारण हो सकते हैं।
इसलिए अगर कमजोरी लंबे समय से बनी हुई है या बढ़ रही है तो केवल protein powder लेना शुरू करने के बजाय इसके कारण की जांच कराना बेहतर है।
क्या Protein Powder जरूरी है?
नहीं, हर व्यक्ति को protein powder की जरूरत नहीं होती।
ज्यादातर स्वस्थ लोग संतुलित और विविध भोजन से अपनी protein जरूरत पूरी कर सकते हैं। कुछ लोगों को डॉक्टर या dietitian की सलाह पर supplement की जरूरत पड़ सकती है।
बिना जरूरत supplement लेने के बजाय पहले अपने भोजन और स्वास्थ्य की स्थिति को समझना बेहतर है।
खासकर किडनी या दूसरी गंभीर बीमारी वाले व्यक्ति को protein supplement शुरू करने से पहले healthcare professional से सलाह लेनी चाहिए।
किन लोगों को अपने पोषण पर विशेष ध्यान देना चाहिए?
इन लोगों में nutrition पर विशेष ध्यान देना उपयोगी हो सकता है:
- छोटे बच्चे
- बुजुर्ग
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
- लंबे समय से बीमार लोग
- बीमारी या ऑपरेशन के बाद recovery कर रहे लोग
- जिनका वजन लगातार कम हो रहा हो
- जिनकी भूख लंबे समय से कम हो
- जिन्हें खाने या निगलने में परेशानी होती है
इनमें से किसी व्यक्ति में पोषण की कमी का संदेह हो तो healthcare professional से उचित सलाह लेना बेहतर है।
निष्कर्ष
प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन केवल कमजोरी देखकर यह नहीं कहा जा सकता कि किसी व्यक्ति में protein deficiency है।
दाल, चना, राजमा, सोयाबीन, दूध, दही, अंडा, मछली और अन्य protein-rich foods को संतुलित भोजन में शामिल करना उपयोगी हो सकता है।
अगर वजन लगातार कम हो रहा है, कमजोरी बनी हुई है, मांसपेशियों की ताकत घट रही है या भोजन पर्याप्त नहीं हो पा रहा है, तो इसके कारण की जांच कराना जरूरी है।
संतुलित भोजन का मतलब केवल ज्यादा protein लेना नहीं, बल्कि शरीर की जरूरत के अनुसार अलग-अलग पोषक तत्वों को उचित मात्रा में लेना है।


