उत्तर प्रदेश में पनीर और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग ने विशेष अभियान चलाया। गाजियाबाद, मथुरा और सहारनपुर में 25 विनिर्माण इकाइयों पर कार्रवाई की गई।
अभियान में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की 24 विशेष प्रवर्तन टीमों ने हिस्सा लिया। टीमों ने प्रमुख दुग्ध और दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयों का आकस्मिक निरीक्षण किया।
जांच के दौरान कुछ इकाइयों में पनीर बनाने में औद्योगिक प्रयोग वाले रसायनों के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई। कुछ जगहों पर पामोलिन ऑयल या रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल की बात भी सामने आई।
इसके अलावा, कुछ स्थानों पर खाद्य पदार्थों का निर्माण अस्वच्छ परिस्थितियों में होता पाया गया।
25 विनिर्माण इकाइयों में हुई कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार, प्राप्त सूचना और जनहित को देखते हुए विशेष टीमों का गठन किया गया था।
इन टीमों ने तीनों जिलों में दुग्ध और दुग्ध उत्पाद बनाने वाली इकाइयों की जांच की।
अभियान के दौरान 25 इकाइयों में कार्रवाई की गई। वहीं, तीन इकाइयां बंद या गैर-संचालित मिलीं।
टीमों ने कच्चे माल और तैयार खाद्य सामग्री की भी जांच की। साथ ही, निर्माण प्रक्रिया और वहां की स्वच्छता व्यवस्था को देखा गया।
पनीर बनाने में रसायन और तेल के इस्तेमाल की जानकारी
विभाग के अनुसार, कुछ इकाइयों में पनीर निर्माण के दौरान औद्योगिक प्रयोग वाले रसायनों का इस्तेमाल पाया गया।
वहीं, कुछ स्थानों पर पामोलिन ऑयल या रिफाइंड वेजिटेबल ऑयल के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई।
कुछ इकाइयों में खाद्य पदार्थों का निर्माण अस्वच्छ परिस्थितियों में भी किया जा रहा था।
अनियमितता मिलने पर संबंधित सामग्री को नष्ट कराया गया। कुछ अपमिश्रकों को जब्त भी किया गया।
72 खाद्य नमूने जांच के लिए लिए गए
अभियान के दौरान कुल 72 खाद्य नमूने लिए गए हैं।
इन samples को laboratory testing के लिए भेजा जा रहा है। इसके बाद, जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
अगर किसी sample में निर्धारित food safety standards का उल्लंघन मिलता है, तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इसलिए inspection के दौरान मिली अनियमितता और laboratory में साबित हुई मिलावट को अलग-अलग समझना जरूरी है।
7,686 किलो खाद्य सामग्री नष्ट
विभाग के अनुसार, अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में तैयार पाई गई 7,686 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई।
इस सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 10 लाख रुपये बताई गई है।
इसके अलावा, 2,131 किलोग्राम खाद्य सामग्री और अपमिश्रक जब्त किए गए। इनकी अनुमानित कीमत करीब 4.75 लाख रुपये बताई गई है।
इस तरह अभियान में कुल 9,817 किलोग्राम खाद्य सामग्री और अपमिश्रकों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
छह मामलों में दर्ज हुई एफआईआर
अभियान के दौरान गंभीर मामलों में छह एफआईआर दर्ज की गईं।
IANS के अनुसार, पांच मामले पनीर निर्माण में औद्योगिक प्रयोग वाले रसायनों और तेल के इस्तेमाल से जुड़े हैं। इनमें अस्वच्छ परिस्थितियों में खाद्य पदार्थ बनाने के मामले भी शामिल हैं।
इसके साथ ही, सरकारी कार्य में बाधा डालने के मामले में एक और एफआईआर दर्ज हुई।
गाजियाबाद में तीन और मथुरा में दो मामलों में एफआईआर दर्ज की गई। सहारनपुर में भी संबंधित अनियमितताओं पर कार्रवाई हुई।
आगे भी जारी रहेगा खाद्य सुरक्षा अभियान
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अनुसार, प्रदेश में दुग्ध और दुग्ध उत्पादों की जांच लगातार जारी है।
खास तौर पर, पनीर जैसे रोजाना इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाई गई है।
विभाग का कहना है कि मिलावट पर रोक लगाने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।
पनीर में मिलावट क्यों चिंता की बात है?
पनीर दूध से बनने वाला खाद्य पदार्थ है। इसलिए इसकी गुणवत्ता सीधे food safety से जुड़ी है।
पनीर बनाने में गलत या गैर-अनुमत सामग्री का इस्तेमाल होने पर इसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
साथ ही, गंदे वातावरण में तैयार किया गया भोजन दूषित हो सकता है। इससे foodborne illness का जोखिम बढ़ सकता है।
FSSAI ने milk और milk products के लिए food safety और hygiene से जुड़े guidance documents जारी किए हैं। इनमें साफ-सफाई और सुरक्षित food handling पर जोर दिया गया है।
पनीर में किस तरह की मिलावट हो सकती है?
खाद्य पदार्थों में अलग-अलग तरह के adulterants मिलाए जा सकते हैं। यह उत्पाद की लागत, वजन या texture को बदलने के लिए किया जा सकता है।
FSSAI की milk products guidance में paneer में starch की जांच का एक quick test भी बताया गया है।
हालांकि, घर पर किया गया कोई test laboratory analysis का विकल्प नहीं है। किसी sample में वास्तविक मिलावट की पुष्टि के लिए उचित testing जरूरी हो सकती है।
पनीर खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें?
पनीर खरीदते समय कुछ सामान्य सावधानियां मददगार हो सकती हैं।
- साफ-सफाई वाली जगह से पनीर खरीदें।
- पैकेज्ड पनीर हो तो label जरूर देखें।
- पैकेट फटा या असामान्य रूप से फूला हो तो उसे न खरीदें।
- बहुत असामान्य गंध या रंग वाला पनीर लेने से बचें।
- खरीदने के बाद पनीर को उचित temperature पर रखें।
- खराब होने के संकेत मिलने पर उसे न खाएं।
इसके अलावा, केवल कम कीमत देखकर पनीर खरीदना उचित नहीं है। Food safety को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
क्या देखकर मिलावटी पनीर की पहचान हो सकती है?
सिर्फ देखकर हर तरह की मिलावट की पहचान नहीं की जा सकती।
रंग, गंध या texture में बदलाव संदेह पैदा कर सकता है। लेकिन इससे किसी खास adulterant की पुष्टि नहीं होती।
इसलिए, सोशल मीडिया पर बताए जाने वाले हर घरेलू test को अंतिम प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
FSSAI उपभोक्ताओं को food adulteration से जुड़े कुछ rapid और simple tests की जानकारी भी उपलब्ध कराता है।
पनीर में starch की जांच कैसे होती है?
FSSAI की guidance में paneer, khoa और कुछ दूसरे milk products में starch की जांच के लिए iodine test का उल्लेख है।
इस test में sample को पानी के साथ गर्म किया जाता है। इसके बाद उसे ठंडा करके iodine solution की कुछ बूंदें डाली जाती हैं। नीला रंग starch की मौजूदगी का संकेत दे सकता है।
लेकिन, इसे laboratory confirmation नहीं माना जाना चाहिए।
अगर किसी खाद्य पदार्थ को लेकर गंभीर संदेह है, तो अधिकृत food laboratory में जांच कराना बेहतर है।
अस्वच्छ परिस्थितियों में बना पनीर क्यों जोखिम भरा हो सकता है?
Food preparation में hygiene बहुत महत्वपूर्ण है।
अगर पानी, उपकरण, हाथ या production area साफ नहीं हैं, तो खाद्य पदार्थ दूषित हो सकता है।
इसी तरह, गलत storage से भी food safety प्रभावित हो सकती है।
FSSAI के food safety guidance में food businesses के लिए hygiene और safe handling practices पर जोर दिया गया है।
पनीर को सुरक्षित तरीके से कैसे रखें?
पनीर को खरीदने के बाद उचित तरीके से refrigerate करना चाहिए।
पैकेज्ड product होने पर label पर दिए storage instructions का पालन करें।
साथ ही, लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखे पनीर का सेवन करने से बचें।
अगर पनीर में खराब गंध, असामान्य texture या spoilage के दूसरे संकेत दिखें, तो उसे खाने से बचना बेहतर है।
मिलावटी या संदिग्ध पनीर की शिकायत कैसे करें?
अगर किसी consumer को food adulteration या food safety violation का संदेह है, तो वह FSSAI के Food Safety Connect portal के जरिए शिकायत कर सकता है।
FSSAI के अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए consumers packaged food और food premises से जुड़ी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत के साथ product की तस्वीर या bill जैसे supporting documents भी लगाए जा सकते हैं।
इसके अलावा, FSSAI के अनुसार consumer notified laboratory में किसी food product की testing भी करा सकता है।
शिकायत करते समय क्या सबूत रखें?
अगर किसी food product पर संदेह है, तो उससे जुड़े उपलब्ध evidence को सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है।
मसलन:
- product की तस्वीर
- packaging
- bill
- batch number
- expiry date
- FSSAI licence या registration details
FSSAI भी complaint के साथ relevant proof, जैसे product image और purchase bill, लगाने की सलाह देता है।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश में पनीर और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर चलाए गए अभियान में 25 विनिर्माण इकाइयों पर कार्रवाई की गई।
अभियान में 72 खाद्य नमूने लिए गए। वहीं, 7,686 किलोग्राम खाद्य सामग्री नष्ट कराई गई और 2,131 किलोग्राम सामग्री व अपमिश्रक जब्त किए गए।
गंभीर मामलों में छह एफआईआर भी दर्ज की गईं।
हालांकि, नमूनों की laboratory reports आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कौन-से samples निर्धारित food safety standards पर खरे नहीं उतरे।
उपभोक्ताओं के लिए भी सावधानी जरूरी है। पनीर खरीदते समय साफ-सफाई, packaging और storage पर ध्यान दें।
अंततः, किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट का संदेह होने पर सोशल मीडिया के दावों पर भरोसा करने के बजाय अधिकृत जांच और food safety authorities की मदद लेना बेहतर है।



