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ग्रामीण भारत में बढ़ रहा मधुमेह का बोझ, इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना जरूरी: डॉ. जितेंद्र सिंह

Written by Puja KumariAugust 17, 2026Updated August 17, 2026

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने मधुमेह की रोकथाम को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की अपील की है। उन्होंने ग्रामीण भारत में diabetes की चुनौती पर चिंता जताई।

डॉ. सिंह के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्र अब मधुमेह की समस्या से अछूते नहीं हैं। इसलिए, इससे निपटने के लिए समुदाय के स्तर पर ठोस प्रयास जरूरी हैं।

साथ ही, उन्होंने technology और data-based healthcare को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने शुरुआती पहचान और लगातार निगरानी पर भी जोर दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह रविवार को Research Society for the Study of Diabetes in India (RSSDI) के ग्रामीण मधुमेह आउटरीच डिजिटल पोर्टल के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे। इसी कार्यक्रम में मधुमेह जागरूकता वीडियो लाइब्रेरी ‘विश्वास’ भी शुरू की गई।

मधुमेह की रोकथाम पर देना होगा जोर

डॉ. सिंह ने कहा कि मधुमेह और उससे जुड़ी जटिलताओं का बोझ कम करने के लिए समय पर कदम उठाना जरूरी है।

इसके लिए, उन्होंने चार प्रमुख पहलुओं पर जोर दिया। इनमें रोकथाम, शुरुआती पहचान, समय पर हस्तक्षेप और लगातार follow-up शामिल हैं।

उनके अनुसार, बीमारी की पहचान देर से होने पर स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में, शुरुआती स्तर पर screening और उचित medical advice महत्वपूर्ण हो सकती है।

हालांकि, किसी व्यक्ति की जांच या उपचार उसकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए medical decision healthcare professional की सलाह से ही लेना चाहिए।

ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच जरूरी

केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि भारत ने healthcare के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। वैज्ञानिक research और digital technology में भी देश आगे बढ़ा है।

अब, जरूरत इन सुविधाओं को ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों तक पहुंचाने की है।

इसके अलावा, ग्रामीण समुदायों में health awareness बढ़ाना भी जरूरी है। स्थानीय स्तर पर screening और follow-up की व्यवस्था इस दिशा में मदद कर सकती है।

डॉ. सिंह ने कहा कि ग्रामीण भारत को diabetes की चुनौती से अलग नहीं देखा जा सकता। इसलिए, national health efforts में ग्रामीण क्षेत्रों को पर्याप्त महत्व देना जरूरी है।

भारत की युवा आबादी का भी किया उल्लेख

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की युवा आबादी का भी जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि देश की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम उम्र की है।

ऐसे में, युवा आबादी के स्वास्थ्य की रक्षा करना महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, इसका संबंध देश की productive capacity से भी है।

इसी संदर्भ में, उन्होंने ‘इंडिया-2047’ के vision का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ युवा आबादी इस vision के लिए महत्वपूर्ण है।

करीब 30 गांवों तक पहुंचा कार्यक्रम

RSSDI की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक outreach programme चलाया जा रहा है।

इस पहल के तहत गांवों को गोद लिया जा रहा है। वहां diabetes awareness और screening पर काम किया जा रहा है।

इसके साथ ही, treatment और long-term follow-up की व्यवस्था बनाने का प्रयास है।

IANS के अनुसार, यह programme कई राज्यों के करीब 30 गांवों तक पहुंच चुका है। आने वाले वर्षों में, इसके विस्तार की योजना है।

डिजिटल पोर्टल से मिलेगी मदद

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीण मधुमेह आउटरीच डिजिटल पोर्टल का उद्घाटन भी किया गया।

डॉ. सिंह ने कहा कि यह portal community healthcare को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

इसके जरिए, patient care का documentation किया जा सकेगा। साथ ही, health outcomes की monitoring भी संभव होगी।

इसके अलावा, इससे भविष्य की public health strategies के लिए data जुटाने में मदद मिल सकती है।

ग्रामीण भारत से मिलेगा महत्वपूर्ण health data

डॉ. सिंह ने community-level healthcare को scientific documentation से जोड़ने पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से मिलने वाला वास्तविक data research के लिए उपयोगी हो सकता है।

इस data से, researchers को बीमारी के patterns समझने में मदद मिल सकती है। वहीं, policymakers भी इसका इस्तेमाल future health strategies तैयार करने में कर सकते हैं।

इस तरह, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं और research के बीच बेहतर संबंध बनाया जा सकता है।

‘विश्वास’ वीडियो लाइब्रेरी भी शुरू

कार्यक्रम में मधुमेह जागरूकता वीडियो लाइब्रेरी ‘विश्वास’ भी शुरू की गई।

इसका उद्देश्य diabetes awareness से जुड़ी जानकारी को digital माध्यम से उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे resources लोगों तक health information पहुंचाने का एक अतिरिक्त माध्यम बन सकते हैं।

हालांकि, online information को व्यक्तिगत medical advice का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

अलग-अलग संस्थाओं के बीच सहयोग की अपील

डॉ. जितेंद्र सिंह ने diabetes prevention और management के लिए बेहतर coordination की जरूरत बताई।

उन्होंने सरकारी एजेंसियों, academic institutions, technology partners, private organisations और local health workers के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

उनके अनुसार, मधुमेह जैसी स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए coordinated approach जरूरी है।

इसके लिए, medical expertise के साथ technology और community participation को भी जोड़ना होगा।

ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

RSSDI का outreach programme विशेषज्ञ चिकित्सा संस्थानों को ग्रामीण समुदायों के करीब लाने की कोशिश कर रहा है।

डॉ. सिंह ने इसे national health efforts को support करने वाली पहल बताया।

इस तरह, ऐसे programmes में awareness से लेकर screening और follow-up तक कई स्तरों पर काम किया जा सकता है।

हालांकि, किसी programme की वास्तविक प्रभावशीलता उसके implementation और लंबे समय के health outcomes से ही बेहतर तरीके से आंकी जा सकती है।

आगे विस्तार की योजना

IANS की रिपोर्ट के अनुसार, RSSDI का ग्रामीण outreach programme कई राज्यों के करीब 30 गांवों तक पहुंचा है।

फिलहाल, आने वाले वर्षों में इसे और क्षेत्रों तक ले जाने की योजना है।

इसके बाद, diabetes awareness, screening, treatment और follow-up को एक structured system से जोड़ने पर जोर रहेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

मधुमेह की चुनौती केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी पहचान और management पर ध्यान देना जरूरी है।

ऐसे में, community-level screening और awareness programmes उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।

इसके अलावा, digital documentation से health services के बारे में data जुटाने में मदद मिल सकती है।

इस data का इस्तेमाल future research और public health planning में किया जा सकता है।

निष्कर्ष

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ग्रामीण भारत में मधुमेह की रोकथाम को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने की जरूरत बताई है।

उन्होंने early detection, timely intervention और continuous monitoring पर जोर दिया।

RSSDI का ग्रामीण outreach programme इस दिशा में एक community-based initiative के रूप में काम कर रहा है।

फिलहाल, यह programme कई राज्यों के करीब 30 गांवों तक पहुंच चुका है। आगे, इसके विस्तार की योजना है।

साथ ही, digital portal के जरिए patient care और health outcomes का documentation करने की कोशिश की जा रही है।

अंततः, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं, technology, medical expertise और community participation को साथ लाने पर diabetes prevention के प्रयासों को मजबूत किया जा सकता है।

Puja Kumari

Puja Kumari is a Registered Nurse and B.Sc. Nursing graduate with two years of clinical experience in a multispecialty hospital. Her areas of interest include patient care, nursing practices, health education and practical healthcare information. Through HealthCareSaathi, she aims to present medically relevant information in clear, simple and reader-friendly language, helping readers better understand their health and care needs.

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This article is for general health education and awareness. It is not a substitute for personal diagnosis or treatment by a qualified healthcare professional.